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श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 10: चैतन्य-वृक्ष के स्कन्ध, शाखाएँ तथा उपशाखाएँ  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  1.10.25 
ताँहार भगिनी दमयन्ती प्रभुर प्रिय दासी ।
प्रभुर भोग - सामग्री ये करे बार - मासि ॥25॥
 
 
अनुवाद
राघव पंडित की बहन दमयंती भगवान की प्रिय दासी थीं। वह हमेशा भगवान चैतन्य के लिए खाना बनाने के लिए तरह-तरह की सामग्रियाँ इकट्ठा करती थीं।
 
Raghava Pandita's sister, Damayanti, was Mahaprabhu's favorite maidservant. She always gathered various food items and prepared food for Mahaprabhu.
तात्पर्य
श्रील भक्तिसिद्धान्त सरस्वती ठाकुर ने अपने अनुभाष्य में लिखा है, "गौरा-गणोद्देश-दीपिका (167) में उल्लेख मिलता है, गुणमाला व्रजे यासीद् दमयंती तु तत्-स्वसा: गुणमाला नाम की गोपी राघव पंडित की बहन दमयंती रूप में प्रकट हुईं। कोलकाता के सियालदह स्टेशन से शुरू होकर पूर्वी बंगाल रेलवे लाइन पर सोदापुर नाम का एक स्टेशन है, जो कोलकाता से बहुत दूर नहीं है।इस स्टेशन से एक मील के भीतर, गंगा के पश्चिमी हिस्से की ओर, पानीहाटी नाम का एक गांव है, जिसमें राघव पंडित के आवासीय क्वार्टर अभी भी मौजूद हैं। राघव पंडित की समाधि पर कंक्रीट के प्लेटफॉर्म पर एक बेल है। पास ही एक टूटे-फूटे मंदिर में मदन-मोहन देवता भी हैं। इस मंदिर का प्रबंधन श्री शिवचंद्र राय चौधरी नामक एक स्थानीय जमींदार के द्वारा किया जाता है। मकरध्वज कर भी पानीहाटी के निवासी थे।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)