vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री चैतन्य चरितामृत
»
लीला 1: आदि लीला
»
अध्याय 10: चैतन्य-वृक्ष के स्कन्ध, शाखाएँ तथा उपशाखाएँ
»
श्लोक 151
श्लोक
1.10.151
निर्लोम गङ्गादास, आर विष्णुदास ।
एइ सबेर प्रभु - सङ्गे नीलाचले वास ॥151॥
अनुवाद
निर्लोम गंगादास और विष्णुदास उन भक्तों में छत्तीसवें और सैंतीसवें थे जो श्री चैतन्य महाप्रभु के सेवक के रूप में जगन्नाथ पुरी में रहते थे।
Nirlom Gangadas and Vishnudas were the thirty-sixth and thirty-seventh devotees who lived as servants of Sri Chaitanya Mahaprabhu in Jagannath Puri.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×