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श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 10: चैतन्य-वृक्ष के स्कन्ध, शाखाएँ तथा उपशाखाएँ  »  श्लोक 137
 
 
श्लोक  1.10.137 
माधवी - देवी - शिखि - माहितिर भगिनी ।
श्री - राधार दासी - मध्ये याँर नाम गणि ॥137॥
 
 
अनुवाद
प्रमुख भक्तों में सत्रहवीं, माधवीदेवी, शिखी माहिती की छोटी बहन थीं। ऐसा माना जाता है कि वे पहले श्रीमती राधारानी की दासी थीं।
 
Madhavidevi was the seventeenth of the prominent devotees and the younger sister of Shikhimahiti. She is considered to have been a maidservant of Srimati Radharani in a previous life.
तात्पर्य
चैतन्य-चरितामृत के अन्त्य-लीला में अध्याय दो, छंद 104-106 में माधवीदेवी का वर्णन है। श्री चैतन्य महाप्रभु उन्हें श्रीमती राधारानी की एक दासी मानते थे। इस संसार में, चैतन्य महाप्रभु के ढाई बहुत गोपनीय भक्त थे। तीन थे - स्वरूप गोस्वामी, श्री रामानांद राया और शिखी माधिती, और शिखी माधिती की बहन माधवीदेवी, एक महिला होने के कारण, आधा मानी जाती थीं। इस प्रकार यह ज्ञात है कि श्री चैतन्य महाप्रभु के ढाई गोपनीय भक्त थे।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)