श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 10: चैतन्य-वृक्ष के स्कन्ध, शाखाएँ तथा उपशाखाएँ  »  श्लोक 132
 
 
श्लोक  1.10.132 
आलिङ्गन करि’ ताँरे बलिल वचन ।
तुमि पाण्डु, पञ्च - पाण्डवतोमार नन्दन ॥132॥
 
 
अनुवाद
भगवान ने राया भवानंद को गले लगाते हुए कहा, "आप पहले पांडु के रूप में प्रकट हुए थे, और आपके पांच पुत्र पांच पांडवों के रूप में प्रकट हुए।"
 
Mahaprabhu embraced Bhavananda Rai and said, “You first appeared as Pandu and your five sons appeared as the five Pandavas.”
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)