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अनुवाद
तीन भाई गोविंद, माधव और वासुदेव वृक्ष की अस्सी-दूसरी, अस्सी-तीसरी और चौरासी शाखाएँ थीं। भगवान चैतन्य और नित्यानंद अपने कीर्तन प्रदर्शनों में नृत्य करते थे।
The three brothers named Govind, Madhav and Vasudev were the eighty-second, eighty-third and eighty-fourth branches of the tree. Sri Chaitanya Mahaprabhu and Nityananda Prabhu used to dance in his kirtans.
तात्पर्य
तीन भाई, गोविंदा, माधवा व वासुदेव घोष, कायस्थ परिवार से संबंध रखते थे। गोविंदा ने आगड़वीप में गोपीनाथ मंदिर की स्थापना की, जहाँ वे निवास करते थे। माधवा घोष कीर्तन करने में निपुण थे। इस संसार में कोई भी उनका मुकाबला नहीं कर सकता था। वे वृंदावन के गायक के रूप में जाने जाते थे और श्री नित्यानंद प्रभु को बहुत प्रिय थे। ऐसा कहा जाता है कि जब तीनों भाई संकीर्तन करते थे, तो प्रभु चैतन्य और नित्यानंद तुरंत आनंद में नाचने लगते थे। गौर-गणोद्देश-दीपिका (188) के अनुसार, तीनों भाई पूर्व में कलावती, रसोल्लासा और गुणतुंगा थे, जिन्होंने श्री विशाखा गोपी द्वारा रचित गीतों का पाठ किया था। तीनों भाई सात दलों में से एक थे, जिन्होंने कीर्तन किया था जब प्रभु श्री चैतन्य महाप्रभु ने जगन्नाथ पुरी में रथ-यात्रा उत्सव में भाग लिया था। उनकी पार्टी में मुख्य नर्तक वक्रेवर पंडित थे। मध्य-लीला, अध्याय तेरह, श्लोक 42 और 43 में इसका विशद वर्णन किया गया है।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥