श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 9: अद्वैत आचार्य की महिमा  »  श्लोक 94
 
 
श्लोक  3.9.94 
পরম তপস্বী নিরপেক্ষ দামোদর
শুনি’ ক্রোধে লাগিলেন করিতে উত্তর
परम तपस्वी निरपेक्ष दामोदर
शुनि’ क्रोधे लागिलेन करिते उत्तर
 
 
अनुवाद
यह प्रश्न सुनकर दामोदर पंडित, जो अत्यन्त तपस्वी और निष्पक्ष थे, क्रोधित हो गये और बोले।
 
Hearing this question, Damodar Pandit, who was very ascetic and impartial, became angry and said.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)