श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 9: अद्वैत आचार्य की महिमा  »  श्लोक 89
 
 
श्लोक  3.9.89 
এই মত শ্রীবাসাদি-ভক্ত-গণ-ঘরে
ভিক্ষা করি’ সবারেই পূর্ণ-কাম করে
एइ मत श्रीवासादि-भक्त-गण-घरे
भिक्षा करि’ सबारेइ पूर्ण-काम करे
 
 
अनुवाद
इस प्रकार भगवान ने श्रीवासों तथा अन्य भक्तों के घर भोजन स्वीकार किया और उनकी इच्छाएँ पूरी कीं।
 
Thus the Lord accepted food at the homes of Srivasas and other devotees and fulfilled their desires.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)