श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 9: अद्वैत आचार्य की महिमा  »  श्लोक 75-76
 
 
श्लोक  3.9.75-76 
যম, কাল, মৃত্যু যাঙ্র আজ্ঞাশিরে ধরে
যাঙ্র পদ বাঞ্ছে যোগেশ্বর মুনীশ্বরে
যে-তোমা-স্মরণে সর্ব-বন্দ-বিমোচন
কি বিচিত্র তারে এই ঝড বরিষণ
यम, काल, मृत्यु याङ्र आज्ञाशिरे धरे
याङ्र पद वाञ्छे योगेश्वर मुनीश्वरे
ये-तोमा-स्मरणे सर्व-बन्द-विमोचन
कि विचित्र तारे एइ झड वरिषण
 
 
अनुवाद
जिनके सिर पर यमराज, काल और मृत्यु का शासन है, जिनके चरणकमलों की कामना श्रेष्ठ योगी और मुनि करते हैं और जिनका स्मरण करने से मनुष्य समस्त बंधनों से मुक्त हो जाता है, उनके लिए वायु और वर्षा का प्रबंध करना क्या अद्भुत है?
 
Is it strange to arrange for air and rain for the one who is ruled by Yamaraja, time and death, whose feet are desired by the best yogis and sages and by remembering whom a man becomes free from all bondages?
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)