श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 9: अद्वैत आचार्य की महिमा  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  3.9.7 
যে দিনে যে ভক্ত-গৃহে হয নিমন্ত্রণ
তাহাই পরম প্রীতে করেন ভোজন
ये दिने ये भक्त-गृहे हय निमन्त्रण
ताहाइ परम प्रीते करेन भोजन
 
 
अनुवाद
जब भी भगवान को किसी भक्त के घर आमंत्रित किया जाता तो वे बड़े प्रेम से वहां भोजन करते।
 
Whenever God was invited to a devotee's house, he would eat there with great love.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)