श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 9: अद्वैत आचार्य की महिमा  »  श्लोक 59
 
 
श्लोक  3.9.59 
ভোজন করেন শ্রী-চৈতন্য-ভগবান্
অদ্বৈত-সিṁহের করি’ পূর্ণ মনস্-কাম
भोजन करेन श्री-चैतन्य-भगवान्
अद्वैत-सिꣳहेर करि’ पूर्ण मनस्-काम
 
 
अनुवाद
इस प्रकार भगवान श्री चैतन्य ने भोजन किया और सिंह सदृश अद्वैत की इच्छाओं को संतुष्ट किया।
 
Thus Lord Sri Chaitanya ate food and satisfied the desires of the lion-like Advaita.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)