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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 3: अंत्य-खण्ड
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अध्याय 9: अद्वैत आचार्य की महिमा
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श्लोक 56
श्लोक
3.9.56
আমি ত’ এ-মত কভু নাহি খাই শাক
সকলি বিচিত্র—যত করিযাছ পাক”
आमि त’ ए-मत कभु नाहि खाइ शाक
सकलि विचित्र—यत करियाछ पाक”
अनुवाद
"मैंने ऐसा शाक पहले कभी नहीं खाया। आपने जो भी पकाया है, वह अद्भुत है।"
"I've never had a vegetable like this before. Whatever you've cooked is amazing."
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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