श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 9: अद्वैत आचार्य की महिमा  »  श्लोक 55
 
 
श्लोक  3.9.55 
হাসিযা বলেন প্রভু,—“শুনহ আচার্য!
কোথায শিখিলা এত রন্ধনের কার্য?
हासिया बलेन प्रभु,—“शुनह आचार्य!
कोथाय शिखिला एत रन्धनेर कार्य?
 
 
अनुवाद
भगवान ने मुस्कुराते हुए पूछा, "सुनो, आचार्य, तुमने ये सब व्यंजन बनाना कहाँ से सीखा है?"
 
The Lord smiled and asked, “Listen, Acharya, where did you learn to cook all these dishes?”
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)