श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 9: अद्वैत आचार्य की महिमा  »  श्लोक 53
 
 
श्लोक  3.9.53 
অদ্বৈতেরে গৌরচন্দ্র বলেন হাসিযা
“কেনে এডি ব্যঞ্জন, জানহ তুমি ইহা?
अद्वैतेरे गौरचन्द्र बलेन हासिया
“केने एडि व्यञ्जन, जानह तुमि इहा?
 
 
अनुवाद
गौरचन्द्र ने तब मुस्कुराकर अद्वैत से कहा, "क्या तुम जानते हो कि मैं ये अवशेष क्यों छोड़ रहा हूँ?
 
Gaurachandra then smiled and said to Advaita, “Do you know why I am leaving these remains?
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)