श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 9: अद्वैत आचार्य की महिमा  »  श्लोक 42
 
 
श्लोक  3.9.42 
ঘৃত, দধি, দুগ্ধ, সর, নবনী, পিষ্টক
নানা-বিধ শর্করা, সন্দেশ, কদলক
घृत, दधि, दुग्ध, सर, नवनी, पिष्टक
नाना-विध शर्करा, सन्देश, कदलक
 
 
अनुवाद
उन्होंने घी, दही, दूध, मलाई, मक्खन, पिष्टक (चावल से बनी मिठाई), विभिन्न प्रकार की मिठाइयाँ, संदेश और केले भी परोसे।
 
They also served ghee, curd, milk, cream, butter, pishtak (sweet made from rice), various types of sweets, sandesh and bananas.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)