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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 3: अंत्य-खण्ड
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अध्याय 9: अद्वैत आचार्य की महिमा
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श्लोक 379
श्लोक
3.9.379
সিদ্ধ-বৈষ্ণবের যেন বিষম ব্যবহার
কহিলাঙ, ইহা বুঝিবারে শক্তি কার
सिद्ध-वैष्णवेर येन विषम व्यवहार
कहिलाङ, इहा बुझिबारे शक्ति कार
अनुवाद
इस प्रकार मैंने एक उत्तम वैष्णव के असाधारण लक्षण बताये हैं, फिर भी इसे कौन समझ सकता है?
Thus I have described the extraordinary characteristics of a perfect Vaishnava, yet who can understand it?
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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