श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 9: अद्वैत आचार्य की महिमा  »  श्लोक 351
 
 
श्लोक  3.9.351 
অপরাধি-প্রায যেন হৈযা আপনে
অপরাধ মাগিযা লযেন তাঙ্র স্থানে
अपराधि-प्राय येन हैया आपने
अपराध मागिया लयेन ताङ्र स्थाने
 
 
अनुवाद
तब भगवान ने भृगु से क्षमा मांगी, मानो उन्होंने कोई अपराध किया हो।
 
Then the Lord asked forgiveness from Bhrigu, as if he had committed some crime.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)