श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 9: अद्वैत आचार्य की महिमा  »  श्लोक 344
 
 
श्लोक  3.9.344 
চরণে ধরিযা বুঝাযেন মহেশ্বরী
“জ্যেষ্ঠ ভাইরে কি প্রভু, এত ক্রোধ করি?”
चरणे धरिया बुझायेन महेश्वरी
“ज्येष्ठ भाइरे कि प्रभु, एत क्रोध करि?”
 
 
अनुवाद
फिर उसने शिवजी के पैर पकड़ लिए और बोली, "हे प्रभु, क्या एक बड़े भाई को इतना क्रोधित होना चाहिए?"
 
Then she caught hold of Shiva's feet and said, "O Lord, should an elder brother be so angry?"
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)