श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 9: अद्वैत आचार्य की महिमा  »  श्लोक 332
 
 
श्लोक  3.9.332 
তবে পুত্র-স্নেহে ব্রহ্মা ক্রোধ পাসরিলা
জল পাই’ যেন অগ্নি সুসাম্য হৈলা
तबे पुत्र-स्नेहे ब्रह्मा क्रोध पासरिला
जल पाइ’ येन अग्नि सुसाम्य हैला
 
 
अनुवाद
तब ब्रह्माजी ने अपने पुत्र के प्रति स्नेहवश अपने क्रोध को उसी प्रकार नियंत्रित कर लिया, जैसे जल से अग्नि को बुझाया जाता है।
 
Then Brahma, out of affection for his son, controlled his anger in the same way as fire is extinguished with water.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)