श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 9: अद्वैत आचार्य की महिमा  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  3.9.32 
এই-মত মনে চিন্তে অদ্বৈত-আচার্য
রন্ধন করেন মনে ভাবি’ সেই কার্য
एइ-मत मने चिन्ते अद्वैत-आचार्य
रन्धन करेन मने भावि’ सेइ कार्य
 
 
अनुवाद
अद्वैत आचार्य भोजन पकाते समय इसी प्रकार सोचते रहे।
 
Advaita Acharya kept thinking like this while cooking food.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)