श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 9: अद्वैत आचार्य की महिमा  »  श्लोक 297
 
 
श्लोक  3.9.297 
অদ্বৈতের লাগি’ মোর এই অবতার
মোর কর্ণে বাজে আসি’ নাডার হুঙ্কার
अद्वैतेर लागि’ मोर एइ अवतार
मोर कर्णे बाजे आसि’ नाडार हुङ्कार
 
 
अनुवाद
"मैंने केवल अद्वैत प्रभु के कारण ही अवतार लिया है। उनकी ऊँची पुकार आज भी मेरे कानों में गूंज रही है।"
 
"I have incarnated only because of Advaita Prabhu. His loud call still resounds in my ears."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)