श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 9: अद्वैत आचार्य की महिमा  »  श्लोक 269
 
 
श्लोक  3.9.269 
অদ্বৈতের প্রসাদে যে হয কৃষ্ণ-ভক্তি
জানিহ অদ্বৈতে কৃষ্ণের পূর্ণ-শক্তি
अद्वैतेर प्रसादे ये हय कृष्ण-भक्ति
जानिह अद्वैते कृष्णेर पूर्ण-शक्ति
 
 
अनुवाद
"भक्ति अद्वैत प्रभु की कृपा से संभव है। यह निश्चित जान लो कि उनमें कृष्ण की सभी शक्तियाँ विद्यमान हैं।"
 
"Devotion is possible by the grace of the non-dual Lord. Know for certain that all the powers of Krishna are present in Him."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)