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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 3: अंत्य-खण्ड
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अध्याय 9: अद्वैत आचार्य की महिमा
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श्लोक 266
श्लोक
3.9.266
কায-মনো-বচনে মোহার এই কথাএ-দুইর
প্রেম-ভক্তি হৌক সর্বথা”
काय-मनो-वचने मोहार एइ कथाए-दुइर
प्रेम-भक्ति हौक सर्वथा”
अनुवाद
"मैं अपने शरीर, मन और वाणी से उन दोनों को हर प्रकार से प्रेम-भक्ति का आशीर्वाद देता हूँ।"
"I bless them both with love and devotion in every way with my body, mind and words."
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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