श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 9: अद्वैत आचार्य की महिमा  »  श्लोक 259
 
 
श्लोक  3.9.259 
“জয-জয শ্রী-অদ্বৈত পতিত-পাবন
মুই-দুই-পতিতেরে করহ মোচন”
“जय-जय श्री-अद्वैत पतित-पावन
मुइ-दुइ-पतितेरे करह मोचन”
 
 
अनुवाद
"पतित आत्माओं के उद्धारक श्री अद्वैत की जय हो! हम अत्यंत पतित हैं, अतः कृपया हमारा उद्धार करें।"
 
"Hail Sri Advaita, the savior of fallen souls! We are extremely fallen, so please save us."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)