श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 9: अद्वैत आचार्य की महिमा  »  श्लोक 245
 
 
श्लोक  3.9.245 
তবে প্রভু, মোরে না উদ্ধার কোন্ কাজে
মুঞি কি না হও প্রভু, সṁসারের মাঝে
तबे प्रभु, मोरे ना उद्धार कोन् काजे
मुञि कि ना हओ प्रभु, सꣳसारेर माझे
 
 
अनुवाद
"फिर ऐ मेरे रब, तू हमें क्यों नहीं बचाता? क्या हम इस दुनिया के नहीं हैं?
 
“Then why don't you save us, O my Lord? Are we not of this world?
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)