श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 9: अद्वैत आचार्य की महिमा  »  श्लोक 240
 
 
श्लोक  3.9.240 
দূরে থাকি’ দুই ভাই দণ্ডবত করি’
কাকুর্বাদ করেন দশনে তৃণ ধরি’
दूरे थाकि’ दुइ भाइ दण्डवत करि’
काकुर्वाद करेन दशने तृण धरि’
 
 
अनुवाद
दोनों भाई दूर से ही भगवान को प्रणाम करते हुए गिर पड़े। मुँह में तिनका लेकर वे बड़ी विनम्रता से बोले।
 
Both brothers fell down, bowing to God from a distance. With straws in their mouths, they spoke with great humility.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)