श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 9: अद्वैत आचार्य की महिमा  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  3.9.24 
আচার্য রান্ধেন, পতি-ব্রতা কার্য করে
দুই জনা ভাসে যেন আনন্দ-সাগরে
आचार्य रान्धेन, पति-व्रता कार्य करे
दुइ जना भासे येन आनन्द-सागरे
 
 
अनुवाद
अद्वैत आचार्य ने भोजन पकाया और उनकी सती पत्नी ने सहायता की। इस प्रकार वे दोनों सुख के सागर में तैरते रहे।
 
Advaita Acharya cooked the food, and his chaste wife helped. Thus, they both floated in the ocean of happiness.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)