श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 9: अद्वैत आचार्य की महिमा  »  श्लोक 219
 
 
श्लोक  3.9.219 
জয কৃষ্ণ-চৈতন্য শ্রী-শচীর নন্দন
এই-মত গাই নাচে শত-সঙ্খ্যা জন
जय कृष्ण-चैतन्य श्री-शचीर नन्दन
एइ-मत गाइ नाचे शत-सङ्ख्या जन
 
 
अनुवाद
“शचीपुत्र श्री कृष्ण चैतन्य की जय हो!” इस प्रकार सैकड़ों लोग कीर्तन करते और नृत्य करते थे।
 
“Victory to Sri Krishna Chaitanya, the son of Sachi!” Hundreds of people chanted and danced in this way.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)