श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 9: अद्वैत आचार्य की महिमा  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  3.9.21 
রন্ধনে বসিলাশ্রী-অদ্বৈত মহাশয
চৈতন্য-চন্দ্রেরে করি’ হৃদযে বিজয
रन्धने वसिलाश्री-अद्वैत महाशय
चैतन्य-चन्द्रेरे करि’ हृदये विजय
 
 
अनुवाद
श्री अद्वैत महाशय ने तब भगवान चैतन्य का ध्यान किया और वे बैठ गए तथा खाना बनाने लगे।
 
Sri Advaita Mahasaya then meditated on Lord Chaitanya and sat down and started cooking.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)