श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 9: अद्वैत आचार्य की महिमा  »  श्लोक 205
 
 
श्लोक  3.9.205 
প্রভু বলে,—“কি সঙ্কেত কৈল হস্ত দিযা
তোমার সঙ্কেত তুমি কহত’ ভাঙ্গিযা”
प्रभु बले,—“कि सङ्केत कैल हस्त दिया
तोमार सङ्केत तुमि कहत’ भाङ्गिया”
 
 
अनुवाद
तब प्रभु ने उससे पूछा, "तुम्हारे हाथों से जो यह भाव-भंगिमा बन रही है, उसका क्या अर्थ है? कृपया समझाओ।"
 
Then the Lord asked him, "What is the meaning of this gesture that your hands are making? Please explain."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)