श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 9: अद्वैत आचार्य की महिमा  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  3.9.19 
লক্ষ্মী-অṁশে জন্ম—অদ্বৈতের পতি-ব্রতা
লাগিলা করিতে কার্য হৈ’ হরষিতা
लक्ष्मी-अꣳशे जन्म—अद्वैतेर पति-व्रता
लागिला करिते कार्य है’ हरषिता
 
 
अनुवाद
अद्वैत की पतिव्रता पत्नी, जो लक्ष्मी का ही अंश थी, प्रसन्नतापूर्वक भोजन बनाने की तैयारी करने लगी।
 
Advaita's devoted wife, who was an incarnation of Lakshmi, happily started preparing food.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)