श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 9: अद्वैत आचार्य की महिमा  »  श्लोक 180
 
 
श्लोक  3.9.180 
প্রভু দেখি’ ভক্ত সব অধিক হরিষে
গাযেন, অদ্বৈত নৃত্য করেন উল্লাসে
प्रभु देखि’ भक्त सब अधिक हरिषे
गायेन, अद्वैत नृत्य करेन उल्लासे
 
 
अनुवाद
जब भक्तों ने भगवान को देखा तो वे अधिक उत्साह से गाने लगे और अद्वैत प्रसन्नतापूर्वक नाचने लगे।
 
When the devotees saw the Lord, they began to sing with greater enthusiasm and Advaita began to dance with joy.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)