श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 9: अद्वैत आचार्य की महिमा  »  श्लोक 179
 
 
श्लोक  3.9.179 
পরম উদ্দাম শুনি’ কীর্তনের ধ্বনি
শ্রী-বিজয আসিযা হৈলা ন্যাসি-মণি
परम उद्दाम शुनि’ कीर्तनेर ध्वनि
श्री-विजय आसिया हैला न्यासि-मणि
 
 
अनुवाद
उस कीर्तन की कोलाहलपूर्ण ध्वनि सुनकर श्रेष्ठ संन्यासी उस स्थान पर आये।
 
Hearing the noisy sound of that kirtan, great monks came to that place.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)