श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 9: अद्वैत आचार्य की महिमा  »  श्लोक 170
 
 
श्लोक  3.9.170 
কেহ বলে,—“জয জয শ্রী-শচীনন্দন”
কেহ বলে,—“জয গৌরচন্দ্র-নারাযণ
केह बले,—“जय जय श्री-शचीनन्दन”
केह बले,—“जय गौरचन्द्र-नारायण
 
 
अनुवाद
कुछ भक्तों ने जप किया, “जय शचीनंदन!” अन्य भक्तों ने जप किया, “जय गौरचंद्र-नारायण!
 
Some devotees chanted, “Jai Sachinandana!” Other devotees chanted, “Jai Gaurachandra-Narayana!
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)