श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 9: अद्वैत आचार्य की महिमा  »  श्लोक 169
 
 
श्लोक  3.9.169 
অদ্বৈত-সিṁহের শ্রী-মুখের এই পদ
ইহার কীর্তনে বাডে সকল সম্পদ
अद्वैत-सिꣳहेर श्री-मुखेर एइ पद
इहार कीर्तने बाडे सकल सम्पद
 
 
अनुवाद
अद्वैतसिंह के मुख से निकले इस श्लोक का जप करने से समस्त ऐश्वर्यों की वृद्धि होती है।
 
Chanting this verse from the mouth of Advaitasingh increases all the luxuries.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)