vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री चैतन्य भागवत
»
खण्ड 3: अंत्य-खण्ड
»
अध्याय 9: अद्वैत आचार्य की महिमा
»
श्लोक 169
श्लोक
3.9.169
অদ্বৈত-সিṁহের শ্রী-মুখের এই পদ
ইহার কীর্তনে বাডে সকল সম্পদ
अद्वैत-सिꣳहेर श्री-मुखेर एइ पद
इहार कीर्तने बाडे सकल सम्पद
अनुवाद
अद्वैतसिंह के मुख से निकले इस श्लोक का जप करने से समस्त ऐश्वर्यों की वृद्धि होती है।
Chanting this verse from the mouth of Advaitasingh increases all the luxuries.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×