श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 9: अद्वैत आचार्य की महिमा  »  श्लोक 157
 
 
श्लोक  3.9.157 
এক-দিন অদ্বৈত সকল ভক্ত-প্রতি
বলিলা পরমানন্দে মত্ত হৈ’ অতি
एक-दिन अद्वैत सकल भक्त-प्रति
बलिला परमानन्दे मत्त है’ अति
 
 
अनुवाद
एक दिन जब अद्वैत प्रभु परमानंद में मग्न थे, तब उन्होंने सभी भक्तों से बात की।
 
One day when Advaita Prabhu was immersed in ecstasy, he spoke to all the devotees.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)