श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 9: अद्वैत आचार्य की महिमा  »  श्लोक 155
 
 
श्लोक  3.9.155 
ভক্তি বিনা প্রভুর জিজ্ঞাসা নাহি আর
ভক্তি-রস-ময শ্রী-চৈতন্য-অবতার
भक्ति विना प्रभुर जिज्ञासा नाहि आर
भक्ति-रस-मय श्री-चैतन्य-अवतार
 
 
अनुवाद
भगवान ने भक्ति के अतिरिक्त किसी अन्य विषय पर चर्चा नहीं की, क्योंकि भगवान चैतन्य भक्ति के रस के अवतार थे।
 
The Lord did not discuss any other subject except devotion, because Lord Chaitanya was the embodiment of the essence of devotion.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)