श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 9: अद्वैत आचार्य की महिमा  »  श्लोक 107
 
 
श्लोक  3.9.107 
তাহান ইচ্ছায আমি আছোঙ্ পৃথিবীতে
তান ঋণ আমি কভু নারিব শুধিতে
ताहान इच्छाय आमि आछोङ् पृथिवीते
तान ऋण आमि कभु नारिब शुधिते
 
 
अनुवाद
"मैं इस दुनिया में उसकी मर्ज़ी से जी रहा हूँ। इसलिए मैं उसका एहसान कभी नहीं चुका पाऊँगा।"
 
"I am living in this world by his will. That is why I will never be able to repay his favor."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)