श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 8: महाप्रभु के नरेंद्र सरोवर में जल खेल  »  श्लोक 94
 
 
श्लोक  3.8.94 
কি মনুষ্য, পশু, পক্ষী হৈ’ যথা তথা
তোমার চরণ যেন দেখিযে সর্বথা
कि मनुष्य, पशु, पक्षी है’ यथा तथा
तोमार चरण येन देखिये सर्वथा
 
 
अनुवाद
“हम जहाँ भी जन्म लें - मनुष्य, पशु या पक्षी के रूप में - हमें सदैव आपके चरणकमलों का दर्शन हो।
 
“Wherever we are born – as human beings, animals or birds – may we always see Your lotus feet.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)