श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 8: महाप्रभु के नरेंद्र सरोवर में जल खेल  »  श्लोक 82
 
 
श्लोक  3.8.82 
অদ্বৈতেরে সবে করিলেন নমস্কার
যাঙ্হার নিমিত্ত শ্রী-চৈতন্য-অবতার
अद्वैतेरे सबे करिलेन नमस्कार
याङ्हार निमित्त श्री-चैतन्य-अवतार
 
 
अनुवाद
सभी ने अद्वैत प्रभु को प्रणाम किया, जो भगवान चैतन्य के आगमन का कारण थे।
 
Everyone bowed down to Advaita Prabhu, who was the reason for the arrival of Lord Chaitanya.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)