श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 8: महाप्रभु के नरेंद्र सरोवर में जल खेल  »  श्लोक 34
 
 
श्लोक  3.8.34 
চলিলেন শ্রী-গরুড-পণ্ডিত হরিষে
নাম-বলে যাঙ্রে না লঙ্ঘিল সর্প-বিষে
चलिलेन श्री-गरुड-पण्डित हरिषे
नाम-बले याङ्रे ना लङ्घिल सर्प-विषे
 
 
अनुवाद
श्री गरुड़ पण्डित भी प्रसन्नतापूर्वक आये। पवित्र नामों के प्रभाव से उन पर सर्प के विष का प्रभाव नहीं हुआ।
 
Sri Garuda Pandita also came happily. Due to the power of the holy names, the snake's venom did not affect him.
तात्पर्य
देखें चैतन्य-चरितामृत, आदि-लीला, अध्याय दस, पद 75 ।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)