vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री चैतन्य भागवत
»
खण्ड 3: अंत्य-खण्ड
»
अध्याय 8: महाप्रभु के नरेंद्र सरोवर में जल खेल
»
श्लोक 34
श्लोक
3.8.34
চলিলেন শ্রী-গরুড-পণ্ডিত হরিষে
নাম-বলে যাঙ্রে না লঙ্ঘিল সর্প-বিষে
चलिलेन श्री-गरुड-पण्डित हरिषे
नाम-बले याङ्रे ना लङ्घिल सर्प-विषे
अनुवाद
श्री गरुड़ पण्डित भी प्रसन्नतापूर्वक आये। पवित्र नामों के प्रभाव से उन पर सर्प के विष का प्रभाव नहीं हुआ।
Sri Garuda Pandita also came happily. Due to the power of the holy names, the snake's venom did not affect him.
तात्पर्य
देखें चैतन्य-चरितामृत, आदि-लीला, अध्याय दस, पद 75 ।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×