श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 7: श्री गदाधर के बगीचे में लीलाएँ  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  3.7.16 
নিরবধি নযনে বহযে প্রেম-ধার
’শ্রী-কৃষ্ণ-চৈতন্য’ বলি’ করেন হুঙ্কার
निरवधि नयने वहये प्रेम-धार
’श्री-कृष्ण-चैतन्य’ बलि’ करेन हुङ्कार
 
 
अनुवाद
उनकी आँखों से लगातार आँसू बह रहे थे और वे ज़ोर से गर्जना कर रहे थे, "श्रीकृष्ण चैतन्य!"
 
Tears were continuously flowing from his eyes and he was roaring loudly, "Sri Krishna Chaitanya!"
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)