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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 3: अंत्य-खण्ड
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अध्याय 7: श्री गदाधर के बगीचे में लीलाएँ
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श्लोक 120
श्लोक
3.7.120
দোঙ্হে বলে,—“আজি হৈল লোচন নির্মল”
দোঙ্হে বলে,—“আজি হৈল জীবন সফল”
दोङ्हे बले,—“आजि हैल लोचन निर्मल”
दोङ्हे बले,—“आजि हैल जीवन सफल”
अनुवाद
वे दोनों बोले, “आज मेरी आँखें पवित्र हो गयीं और मेरा जीवन सफल हो गया!”
Both of them said, “Today my eyes have become pure and my life has become successful!”
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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