vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री चैतन्य भागवत
»
खण्ड 3: अंत्य-खण्ड
»
अध्याय 6: श्री नित्यानंद प्रभु की महिमा
»
श्लोक 134
श्लोक
3.6.134
কিবা জীব নিত্যানন্দ, কিবা ভক্ত-জ্ঞানী
যাঙ্র যেন মত ইচ্ছা না বলযে কেনি
किबा जीव नित्यानन्द, किबा भक्त-ज्ञानी
याङ्र येन मत इच्छा ना बलये केनि
अनुवाद
कोई नित्यानंद को साधारण जीव मान सकता है, कोई उन्हें भक्त मान सकता है, कोई उन्हें ज्ञानी मान सकता है। वे जो चाहें कह सकते हैं।
One may consider Nityananda an ordinary being, another a devotee, another a sage. They can call him whatever they want.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×