श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 6: श्री नित्यानंद प्रभु की महिमा  »  श्लोक 102
 
 
श्लोक  3.6.102 
সেই ক্ষণে ছয পুত্র আজ্ঞাশিরে ধরি’
সম্মুখে দিলেন আনি’ পুরস্কার করি’
सेइ क्षणे छय पुत्र आज्ञाशिरे धरि’
सम्मुखे दिलेन आनि’ पुरस्कार करि’
 
 
अनुवाद
भगवान की आज्ञा मानकर उन्होंने तुरन्त ही देवकी के छः पुत्रों को लाकर दोनों भगवानों के समक्ष प्रस्तुत किया।
 
Obeying the Lord's command, he immediately brought Devaki's six sons and presented them before both the Lords.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)