श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 5: श्री नित्यानंद प्रभु की लीलाएँ  »  श्लोक 746
 
 
श्लोक  3.5.746 
আচার্য বৈষ্ণবানন্দ—পরম-উদার
পূর্বে রঘুনাথ-পুরী নাম খ্যাতি যাঙ্র
आचार्य वैष्णवानन्द—परम-उदार
पूर्वे रघुनाथ-पुरी नाम ख्याति याङ्र
 
 
अनुवाद
आचार्य वैष्णवानंद अत्यंत उदार थे। उन्हें पहले रघुनाथ पुरी के नाम से जाना जाता था।
 
Acharya Vaishnavananda was extremely generous. He was earlier known as Raghunath Puri.
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas