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श्लोक 3.5.734  |
প্রেম-রসে মহামত্ত—বলরাম-দাস
যাঙ্হার বাতাসে সব পাপ যায নাশ |
प्रेम-रसे महामत्त—बलराम-दास
याङ्हार वातासे सब पाप याय नाश |
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| अनुवाद |
| बलरामदास प्रेम की मधुरता में मग्न थे। उनके शरीर को स्पर्श करने वाली पवन-धाराएँ समस्त पापों का नाश कर देती थीं। |
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| Balaramadas was immersed in the sweetness of love. The currents of wind touching his body seemed to destroy all sins. |
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