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श्लोक 3.5.733  |
ধনঞ্জয-পণ্ডিত—মহান্ত বিলক্ষণ
যাঙ্হার হৃদযে নিত্যানন্দ সর্ব-ক্ষণ |
धनञ्जय-पण्डित—महान्त विलक्षण
याङ्हार हृदये नित्यानन्द सर्व-क्षण |
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| अनुवाद |
| धनंजय पंडित एक असाधारण भक्त थे। नित्यानंद सदैव उनके हृदय में निवास करते थे। |
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| Dhananjaya Pandit was an extraordinary devotee. Nityananda always resided in his heart. |
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