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श्लोक 3.5.719  |
তথাপিহ নাম কহি—জানি যাঙ্র যাঙ্র
নাম মাত্র স্মরণে ও তরিযে সṁসার |
तथापिह नाम कहि—जानि याङ्र याङ्र
नाम मात्र स्मरणे ओ तरिये सꣳसार |
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| अनुवाद |
| फिर भी मैं उन लोगों के नाम बताऊंगा जिन्हें मैं जानता हूं, क्योंकि उनके नाम स्मरण मात्र से ही मनुष्य इस संसार से मुक्त हो जाता है। |
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| Still I will tell the names of those people whom I know, because by merely remembering their names a person becomes free from this world. |
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