श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 5: श्री नित्यानंद प्रभु की लीलाएँ  »  श्लोक 719
 
 
श्लोक  3.5.719 
তথাপিহ নাম কহি—জানি যাঙ্র যাঙ্র
নাম মাত্র স্মরণে ও তরিযে সṁসার
तथापिह नाम कहि—जानि याङ्र याङ्र
नाम मात्र स्मरणे ओ तरिये सꣳसार
 
 
अनुवाद
फिर भी मैं उन लोगों के नाम बताऊंगा जिन्हें मैं जानता हूं, क्योंकि उनके नाम स्मरण मात्र से ही मनुष्य इस संसार से मुक्त हो जाता है।
 
Still I will tell the names of those people whom I know, because by merely remembering their names a person becomes free from this world.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)