श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 5: श्री नित्यानंद प्रभु की लीलाएँ  »  श्लोक 693
 
 
श्लोक  3.5.693 
তোমার হিṁসায সে হৈল মোর মতি
মুঞি পাপিষ্ঠের কোন্ লোকে হৈবে গতি”
तोमार हिꣳसाय से हैल मोर मति
मुञि पापिष्ठेर कोन् लोके हैबे गति”
 
 
अनुवाद
“चूँकि मैंने आपको हानि पहुँचाने की इच्छा की थी, तो इस पापी व्यक्ति का क्या भाग्य होगा?”
 
“Since I wished to harm you, what will be the fate of this sinful person?”
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)