श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 5: श्री नित्यानंद प्रभु की लीलाएँ  »  श्लोक 690
 
 
श्लोक  3.5.690 
মহা-জয-জয-ধ্বনি হৈল তখন
দ্বিজের হৈল সর্ব-বন্ধ-বিমোচন
महा-जय-जय-ध्वनि हैल तखन
द्विजेर हैल सर्व-बन्ध-विमोचन
 
 
अनुवाद
तब सभी ने जयकारा लगाया, “जय! जय!” इस प्रकार ब्राह्मण सभी भौतिक बंधनों से मुक्त हो गया।
 
Then everyone shouted, "Victory! Victory!" Thus the Brahmin was freed from all material bondage.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)